भोरमदेव मंदिर का अद्भुत रहस्य -Amazing Mystery of Bhoramdev temple 2023

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छत्तीसगढ़ के भोरमदेव मंदिर की तुलना कई मंदिरों से किया जाता है ,Amazing Mystery of Bhoramdev temple के इतिहास का कुछ अनसुनी बातें जो आप नहीं जानते हैं तथा कुछ ऐसे भी बातें जो आपको बहुत ही अच्छा लगेगा क्योंकि छत्तीसगढ़ के मंदिरों के जिक्र देश दुनिया में किया जाता है उसी से संबंध में भोरमदेव मंदिर की समस्त जानकारी आपको देश लेख में मिल जाएगा

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भोरमदेव मंदिर का परिचय

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य, भारत में स्थित है। यह छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पास स्थित है ,
भोरमदेव मंदिर मध्य प्रदेश के कुछ खजुराहो और उड़ीसा के सूर्य मंदिर से तुलना की जाती है।

मंदिर का महत्व -Amazing Mystery of Bhoramdev temple

भोरमदेव को जानने की दिलचस्पी और बढ़ जाती है, जब मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व तथा उसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में पता लगता है इस वजह से यहां जहां काम मूर्तियां बार्बर इंसानों को हजारों साल के भारत में ले जाती है।
इसके महत्व के कुछ प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं

धार्मिक स्थल: मंदिर भगवान शिव के एक अलग रूप के रूप में माना जाता है, और यहां पूजा और भक्ति की जाती है। यहां कहा जाता है कि भोरमदेव में भगवान शिव के और कहीं धार्मिक स्थल थे

सांस्कृतिक महत्व: मंदिर की शिल्पकला और सौंदर्य का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और यह स्थल कला और संस्कृति को प्रकट करता है। यहां की शिल्प कला मड़वा महल और भोरमदेव की गर्भ ग्रह यहां पर देखने को मिलता है

ऐतिहासिक महत्व: मंदिर 11वीं शताब्दी के आसपास बना है, और इसका इतिहास और पौराणिक महत्व होता है।

शिवजी गुरुदेव के अलौकिक रूप

इसका धार्मिक और प्राथमिक महत्व छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से मात्र 18 किलोमीटर दूर होने के कारण भी है। यहां की मान्यता है कि वह भगवान शिव के अलग रूप हैं। जो सतपुड़ा जंगल में है तथा कुछ भाग में मैकाल पर्वत श्रेणी में भी आता है।

मंदिर का आकर्षण – Bhovram dev temple

भोरमदेव के बारे में मान्यता है कि वह शिव के लिए एक अलग रूप है और इसका निर्माण हुआ है, इसके आसपास और भी देवी देवताएं हैं, जैसे वैष्णव भूत और चयन प्रतिमाएं। भोरमदेव मंदिर का आकर्षण उसके शिल्प कला और आकर्षक आकर के कारण मंदिर इसका आकर्षण केंद्र बना है साथ-साथ मड़वा महल के नाम से चर्चित एक और मंदिर जहां पर कई प्रकार की कलाकृतियों को उकेरा गया है।

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Image from – https://kawardha.gov.in/en/

मंदिर की शिल्पकला – Bhovramdev Fact

मंदिर की निर्माता नागवंशी शासक शिव जी के परम भक्त थे, और भगवान शिव इस मंदिर में शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।

मंदिर की संरचना – Kabirdham Temple

मंदिर दो भागों में विभाजित है – मुख्य मंदिर और मुख मंडल, जिसमें भगवान विष्णु और उनकी अवतार की मूर्तियां स्थापित हैं, साथ ही भगवान गणेश, काल भैरव, और सूर्य भी हैं।

मंदिर की कला और सौंदर्य


यहां की मूर्तियां आंतरिक प्रेम और सुंदरता को प्रदर्शित करती हैं, और गांव क्षेत्र में नृत्य कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर की कला और सौंदर्य तब और अधिक बढ़ जाता है जब इसकी कलाकृतियों को आप मड़वा महल में ऊपरी आंतरिक प्रेम और सुंदरता से भरपूर कलाकृतियों को देखते हैं

उत्सव और संस्कृति

मंदिर का उत्सव साधारण नहीं है, यहां प्रेम और विश्वास का महत्वपूर्ण प्रतीक है। भोरमदेव मंदिर में हर साल भोरमदेव महोत्सव आयोजित किया जाता है इस आयोजन में सभी उत्सव की तरह यहां पर भजन कीर्तन बाहर से आए हुए कलाकार को गाने का मौका दिया जाता है साथ ही अत्यधिक भेद होने के कारण इसकी उत्सव और संस्कृति और भी मनमोहन हो जाता है।

खजुराहो के संदर्भ में

भोरमदेव को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है, और यहां की मूर्तियां कामसूत्र के विभिन्न आसनों से प्रेरित हैं। यहां की कामसूत्र मूर्तियां यह दर्शाता है कि यहां आंतरिक प्रेम और आंतरिक स्नेह को बखुबी भी मंदिरों के दीवारों पर बनाया गया है।

इतिहास और कला का आदान-प्रदान

मंदिर 11वीं शताब्दी के आसपास बना है और हर भाग में कलाकृतियां परी की से करी गई है, जिनमें से प्रमुख रूप से शिव की विवेक ले आओ का प्रदर्शन है।

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